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Gidhwa parsada pakshi vihar bemetara chhattisgarh | Gidhwa bird festival (गिधवा-परसदा पक्षी महोत्‍सव) | Gidhwa bird santuary bemetara chhattisgarh | CG Tourism | Chhattisgarh tourist places

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Gidhwa parsada pakshi vihar bemetara chhattisgarh छत्‍तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में हैं, यहां का एकमात्र पक्षी विहार जिसे छत्‍तीसगढ़ का पहला पक्षी अभ्‍यारण्‍य या bird sanctuary बनाया जायेगा । यह गिधवा नामक छोटा सा गांव जो बेमेतरा से 39 कि.मी. और बिलासपुर से लगभग 61 कि.मी. की दूरी पर‍ स्थित हैं, इसे 2013 में प्रस्‍तावित किया गया था और 2015 में यह पक्षी विहार बना था । गिधवा नामक इस गांव और इसके आस-पास के गांव परसदा और मारो में विदेश से आने वाले पक्षियों के लिए बहुत ही अनुकुल वातावरण हैं, यहां के वेट लैंड में पक्षियों के लिए खाना और रहने के लिए जगह प्रचुर मात्रा में उपलब्‍ध हैं, जिसके कारण हर साल अप्रवासी पक्षी आते हैं, गिधवा और परसदा दोनो जगहों को पर्यटन स्‍थल के रूप में विकसित किये जाने की भी बात की जा रही हैं, जहां लोग जाकर अलग-अलग पक्षियों को जाकर देख पायेंगे । यहां लगभग 12 अलग-अलग देशों से लगभग 150 पक्षी आते हैं, छत्‍तीसगढ़ के इस छोटे से गांव के अलावा भारत के कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, गुजरात, पश्‍चिम बंगाल, उत्‍तरप्रदेश, राजस्‍थान और मध्‍यप्रदेश के कई जगहों में प्रवासी पक्षी आते हैं। Gidhwa...

kabir dharm nagar damakheda balodabazar chhattisgarh | कबीर नगरी दामाखेड़ा | kabir panthi guru | chhattisgarh tourist places | CG Touism | cg tourist places

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कबीर नगरी दामाखेड़ा  दामाखेड़ा रायपुर के समीप लगभग 79 कि.मी. और बिलासपुर से लगभग 58 कि.मी. छत्‍तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले का एक छोटा सा गांव हैं, जिसे छत्‍तीसगढ़ का कबीर नगरी कहा जाता है, क्‍योंकि माना जाता यहां 100 वर्षों पूर्व 1903 ई. में कबीर गुरूओं द्वारा कबीर मठ की स्‍थापना किया गया था । यह जगह बहुत ही धार्मिक मानी जाती हैं, कहा जाता हैं, यह जगह कबीरपथियों को ही समर्पित हैं, कबीर पंथ की शुरूआत कबीर दास से हुई जिनका जन्‍म वाराणसी में हुआ था । एैसा माना जाता है उनके जन्‍म के बाद उनकी माता ने उन्‍हें तालाब में छोड़ दिया जहां वे नीरू नाम के जुलाहा को मिलें जिन्‍होने कबीर जी का पालन-पोषण किया , कबीर जी प्रमुख शिष्‍य मध्‍यप्रदेश अंतर्गत बांधवगढ़ स्थित संत धनी धर्मदास साहब थे । जिन्‍हें कबीर जी ने अपना संपूर्ण अध्‍यात्‍मिक ज्ञान दिया और धनी धर्मदास के दूसरे पूत्र मुक्‍तामणि नाम साहब को 42 पीढ़ी तक कबीर पंथ का प्रचार-प्रसार करने का आशीर्वाद प्रदान किया । इस प्रकार मुक्‍तामणि नाम साहब छत्‍तीसगढ़ के प्रथम वंशगुरू कहलाये और कोरबा के कुदूरमाल में अपनी गद्वी संभाली । दामाखेड़ा की गद्वी गुर...

shiv mandir belpan chhattisgarh | बेलपान शिव मंदिर तखतपुर बिलासपुर छत्‍तीसगढ़ | नर्मदेश्‍वर धाम बेलपान तखतपुर बिलासपुर | narmadeshwar dham belpan takhatpur bilaspur chhattisgarh

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shiv mandir belpan chhattisgarh बिलासपुर जिले के तखतपुर में एक प्राचीन और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शिव मंदिर बेलपान नामक बहुत ही खुबसुरत गांव मे स्थित है, यह मंदिर लोगो के बीच बिलासपुर जिले में ही नहीं बल्कि पुरे छत्‍तीसगढ़ में प्रसिद्ध है, मंदिर को लोगो के बीच इतना प्रसिद्ध करने मे यहां आने वाले श्रद्धालुओं का बहुत बड़ा हाथ है, यहां हर साल शिवरात्रि और सावन के महीने में शिव भक्‍तों कि लोगो कि काफी भीड़ होती है, लोग दूर-दूर से यहां शिव जी के दर्शन के लिए कांवर मे जल भरकर पैदल यहां तक यात्रा करते हैं, यहां हर साल सावन के महीने में मेले का भी आयोजन होता हैं। बेलपान शिव मंदिर तखतपुर बिलासपुर छत्‍तीसगढ़ बेलपान में स्थित यह मंदिर बिलासपुर जिला मुख्‍यालय से 37 कि.मी. दूर तखतपुर तहसील में 10 कि.मी. दूर हैं, यहां पहुंचने के लिए हमेशा तखतपुर से ऑटो कि व्‍यवस्‍था होती है, मंदिर धार्मिक मान्‍यताओं के साथ-साथ ऐतिहासिक रूप से भी काफी प्रसिद्ध हैं, इस मंदिर को भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्‍मारक घोषित किया गया है, इस मंदिर का निर्माण कल्‍चुरियो द्वारा लगभग 16वीं शताब्‍दी में करव...