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Showing posts from July, 2021

Gidhwa parsada pakshi vihar bemetara chhattisgarh | Gidhwa bird festival (गिधवा-परसदा पक्षी महोत्‍सव) | Gidhwa bird santuary bemetara chhattisgarh | CG Tourism | Chhattisgarh tourist places

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Gidhwa parsada pakshi vihar bemetara chhattisgarh छत्‍तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में हैं, यहां का एकमात्र पक्षी विहार जिसे छत्‍तीसगढ़ का पहला पक्षी अभ्‍यारण्‍य या bird sanctuary बनाया जायेगा । यह गिधवा नामक छोटा सा गांव जो बेमेतरा से 39 कि.मी. और बिलासपुर से लगभग 61 कि.मी. की दूरी पर‍ स्थित हैं, इसे 2013 में प्रस्‍तावित किया गया था और 2015 में यह पक्षी विहार बना था । गिधवा नामक इस गांव और इसके आस-पास के गांव परसदा और मारो में विदेश से आने वाले पक्षियों के लिए बहुत ही अनुकुल वातावरण हैं, यहां के वेट लैंड में पक्षियों के लिए खाना और रहने के लिए जगह प्रचुर मात्रा में उपलब्‍ध हैं, जिसके कारण हर साल अप्रवासी पक्षी आते हैं, गिधवा और परसदा दोनो जगहों को पर्यटन स्‍थल के रूप में विकसित किये जाने की भी बात की जा रही हैं, जहां लोग जाकर अलग-अलग पक्षियों को जाकर देख पायेंगे । यहां लगभग 12 अलग-अलग देशों से लगभग 150 पक्षी आते हैं, छत्‍तीसगढ़ के इस छोटे से गांव के अलावा भारत के कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, गुजरात, पश्‍चिम बंगाल, उत्‍तरप्रदेश, राजस्‍थान और मध्‍यप्रदेश के कई जगहों में प्रवासी पक्षी आते हैं। Gidhwa...

kabir dharm nagar damakheda balodabazar chhattisgarh | कबीर नगरी दामाखेड़ा | kabir panthi guru | chhattisgarh tourist places | CG Touism | cg tourist places

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कबीर नगरी दामाखेड़ा  दामाखेड़ा रायपुर के समीप लगभग 79 कि.मी. और बिलासपुर से लगभग 58 कि.मी. छत्‍तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले का एक छोटा सा गांव हैं, जिसे छत्‍तीसगढ़ का कबीर नगरी कहा जाता है, क्‍योंकि माना जाता यहां 100 वर्षों पूर्व 1903 ई. में कबीर गुरूओं द्वारा कबीर मठ की स्‍थापना किया गया था । यह जगह बहुत ही धार्मिक मानी जाती हैं, कहा जाता हैं, यह जगह कबीरपथियों को ही समर्पित हैं, कबीर पंथ की शुरूआत कबीर दास से हुई जिनका जन्‍म वाराणसी में हुआ था । एैसा माना जाता है उनके जन्‍म के बाद उनकी माता ने उन्‍हें तालाब में छोड़ दिया जहां वे नीरू नाम के जुलाहा को मिलें जिन्‍होने कबीर जी का पालन-पोषण किया , कबीर जी प्रमुख शिष्‍य मध्‍यप्रदेश अंतर्गत बांधवगढ़ स्थित संत धनी धर्मदास साहब थे । जिन्‍हें कबीर जी ने अपना संपूर्ण अध्‍यात्‍मिक ज्ञान दिया और धनी धर्मदास के दूसरे पूत्र मुक्‍तामणि नाम साहब को 42 पीढ़ी तक कबीर पंथ का प्रचार-प्रसार करने का आशीर्वाद प्रदान किया । इस प्रकार मुक्‍तामणि नाम साहब छत्‍तीसगढ़ के प्रथम वंशगुरू कहलाये और कोरबा के कुदूरमाल में अपनी गद्वी संभाली । दामाखेड़ा की गद्वी गुर...

India's most expensive vegetable - Bastariya Boda mushroom | बस्‍तरिया बोड़ा की सब्‍जी | Bastar's boda mushroom production | CG Tourism | bastar ka boda

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India's most expensive vegetable - Bastariya Boda mushroom भारत के दण्‍डकारण्‍य में स्थित इस छत्‍तीसगढ़ राज्‍य के बस्‍तर संभाग में भारत की सबसे महंगी सब्‍जी पायी जाती हैं, यह केवल छत्‍तीसगढ़ के इसी संभाग में खासकर बस्‍तर और उसके आस-पास के जिलों में पायी जाती हैं, यहां मानसून आते ही बारिस की पहली बोहार के साथ यह खास तरह का मशरूम बस्‍तर के साल पेड़ के जंगलो में पाया जाता हैं, यह केवल बरसात में ही मिलता हैं, जो जून-जुलाई के महीने यहां ज्‍यादा उत्‍पादन होता हैं, माना जाता हैं, यह छत्‍तीसगढ़ और भारत का सबसे महंगा बिकले वाला सब्‍जी हैं, जिसके दाम 3000रू किलो तक भी पहुंच जाते हैं, इसका कम उत्‍पादन और एक निश्‍चित समय के लिए ही मिलना इसके महंगा होने का कारण हैं, बस्‍तर के आदिवासी जनजाति इसे जंगल से निकालकर लाते हैं, और बस्‍तर और आस-पास के जिलों के बाजारों में बेचते हैं, वर्तमान समय में इस मशरूम सब्‍जी का निर्यात आस-पास के राज्‍यों जैसे - उडि़सा, मध्‍यप्रदेश और झाारखंड में भी होता हैं, मशरूम की यह सब्‍जी दिखने में काली और गोल होती हैं, और यह साल वनो कें जंगलों में जमीन के उपरी सतह पर मिट्टी ...